Thursday, November 16, 2017

हैसीयत

हमलोग कितनी आसानी से दूसरों की अलोचना कर देते हैं । आलोचना वह भी स्वयं से ज्यादा हैसियत रखने वालों की चाहे वह ईश्वर हो अथवा देश का प्रधान मंत्री । तब हम यह भी भूल जाते हैं की हमलोगों को एक मास्टर, क्लर्क, इंजिनियर या डॉक्टर भर बनने में कितनी मेहनत करनी पड़ी होगी कितना कुछ त्यागना पडा होगा । हमलोगों से अपना एक छोटा सा परिवार तो भली-भांति संभल नहीं पाता है पर जो पूरा देश संभालते हैं अथवा ब्रह्माण्ड सम्भालते हैं उनपर गाहे-बगाहे छींटाकशी करने से बाज नहीं आते । हमलोगों का अस्तित्व कितना ओछा है , तुच्छ है इसका एक उदाहरण मुझे अपने जीवन के 25वें वर्ष में ही मिल गया था ।
1975 में हमलोगों की क्रिकेट टीम रांची शहर की अव्वल टीमों में गिनी जाती थी । तब जाड़ों में ही क्रिकेट खेली जाती थी । छुट्टी के दिनों में मैचेस खेले जाते थे । हमारे क्लब का बेंच-स्ट्रेंथ 30 के लगभग रहा करता था । एक शनिवार मैच के पहले हमलोग लाइफ साइज़ प्रैक्टिस कर रहे थे । जाहिर है तीन घंटे के अंदर 30 में से 11 खिलाड़ियों को उनकी दिखती दक्षता पर चुनना था । इतने कम समय में सभी को बैटिंग, बोलिंग और फील्डिंग के पैमाने पर मापना एक टेढ़ी खीर होती थी । बाउंड्री लाइन पर अच्छी-खासी दर्शकों की भीड़ भी जमा हो जाती थी । घमंड तो सर छूता ही था इसलिए एक एटीच्युड भी बनाकर रखना पड़ता था । क्लीन बोल्ड होने पर भी ऐसे लौटते थे जैसे कुछ हुआ ही न हो । कभी-कभी कोई सीनियर भी अपनी सलाह या टिप देने आ जाते थे ।
मेरी बोलिंग उस दिन सटीक पड़ रही थी । खिलाड़ियों और दर्शकों की तालियाँ मुझे उत्साहित भी करती जाती थी । तभी भीड़ में से एक 40-42 वर्ष के छ फूट के आकर्षक व्यक्तित्व वाले महाशय ने आकर लगभग बल्लेबाज़ से बैट छीन लिया । समय की कमी के कारण खीज तो स्वाभाविक थी पर हमलोगों ने उनकी उम्र और आकर्षक व्यक्तिव और विशेषकर सफ़ेद शर्ट-पेंट का लिहाज़ करते कुछ नहीं कहा । उन्होंने पैड या ग्लव्स नहीं माँगी थी तो आशा थी की एक-दो बाल ही खेलेंगे । मैंने अपनी बोलिंग जारी रखी ।
लगातार तीन बाल पर तीन छक्के, एक मिड-ऑफ़ पर और दो मिड विकेट पर । मामला खीज से हटकर चुनौती पर आ गया । मैंने बोलिंग अपने सबसे खतरनाक बॉलर को दे दी । दो छक्के और चार बाउंड्री । उसके बाद तीसरे बालर का भी वैसा ही भयंकर हश्र हुआ । खेलने के तरीके की अगर तुलना की जाये तो सहवाग सबसे श्रेयस्कर होगा ।
इसके बाद उन्होंने सबकी तरफ हाथ हिलाकर अभिवादन किया और भीड़ में खो गए । दर्शक दीर्घा ताली बजा रही थी पर मैदान में हमसब सन्नाटे में थे । दोबारे वह कभी नहीं दिखे । यह सुनामी हमलोगों के मध्य बहुत दिनों तक चर्चा का विषय रहा । वह अवश्य टेस्ट मैच मटेरियल रहा होगा  । इतनी समझ तो थी ही की उसकी रेटिंग कर पाते और हाँ अपनी हैसीयत भी समझ पाते ।