Monday, January 16, 2012

खेल-भावना !

पर्थ मैच के दूसरे दिन जब वार्नर १८० रन पर आउट होकर पविलियन लौटने लगे तब दर्शकों ने खड़े होकर तालियाँ बजा कर विदाई दी. उससे भी ज्यादा खड़े होकर तालियाँ बजा कर लोगों ने सचिन का पविलियन से क्रीज़ तक स्वागत किया. वैसी ही बिदाई लोगों ने सचिन के ८ के स्कोर पर आउट होकर लौटने पर दी. पर इस बार हर्षध्वनि में कमी दिखी. भारतियों में उदासी दिखी. लोगों के बीच यही बात हो रही थी कि वे सचिन को दोबारा खेलते पर्थ में नहीं देख पाएंगे. फिल्डिंग के समय भी सचिन मैदान में अपनी जगह बदलते रहते थे. बाउंडरी लाइन के पास ज्यादातर. क्या ऐसा करने के लिए उन्हें कहा गया था जिससे कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को उनकी झलक मिले ? एक बात और. दर्शक दूसरे खिलाड़ियों पर ताने कसती थी पर सचिन के रहने पर एकदम शांत. पूरे मैच में कहीं भी भारतीय खिलाड़ियों में खेल भावना में कमी नहीं दिखी. ऑस्ट्रेलियन्स ही बहुत अच्छा खेल रहे थे.
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